" नहीं जाने दूंगी तुम्हें खुद से दूर,,,,हमारे बीच आने वाली हर शख्स को इस दुनिया से मिटा दूंगी,,,किस्मत के सहारे चलने वालों में आकृति सिंघानिया नहीं,,,अपनी किस्मत मैं खुद लिखती हूं,,,," 😈😼आकृति ने नुकीले खंजर को अधिराज की बड़ी सी फोटो पर चलाते हुए कहा,,,वो किसी पागल से कम नहीं लग रही थी,,।
अगली सुबह सभी हॉल में बैठे थे,,बस आकृति और आकर्षक को छोड़ । जहां शिविका और गरिमा के चेहरे पर खुशी थी,वही आतिश और अधिराज के चेहरों पर परेशानी दिख रही थी,,,तभी कार रुकने की आवाज आई,,,एक बूढ़ी औरत ,, एक कपल और उनके साथ एक लड़की थी,,जो दिखने में सुंदर थी,,उसने साड़ी पहन रखी थीं,,,सभी एक दूसरे से मिलते हैं,,,दादी सभी को बैठने का कहती हैं और शिवि चाय और नाश्ता लेने किचन में चली जाती हैं।


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