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वो मेरा है,,तेरे बाप की जमीर नहीं,,,😈


          आकृति तो चली गई,,पर अधिराज के मन में बार बार उसका इग्नोर करना ,,, खल रहा था,,," सच में उसे फर्क नहीं पड़ता,इस रिश्ते से,,,नहीं अधि जब उसे नहीं फर्क पड़ रहा तो तुझे क्यों तकलीफ हो रही है,,,कैसे इगनोर कर सकती हैं,, छोडूंगा नहीं उसे मैं,,हिम्मत कैसे हुई मुझे अनदेखा करने की,,,"

                  अधिराज अपनी ही सोच में डूबा हुआ था,,दादी बार बार उसे आवाज दे रही थी,,लेकिन उसे तो कुछ सुनाई नहीं दे रहा था।  आतिश ने उसे ऐसे देख कंधे से मार कर गरिमा की तरफ देखने को कहा ,,उसने अपनी नजर गरिमा की तरफ की,,,

गरिमा " अधि तुम और रिया अकेले में मिल लो,,, तुम दोनों की जान पहचान हो जायेगी,,।

अधिराज उसकी बात सुन परेशान हो जाता,,,जितना ही वो इस समस्या से भाग रहा उतनी ही करीब आ रही हैं,,उसने सिर हिलाकर रिया को अपने साथ चलने को कहा ।

टेरेस पर एक तरफ अधिराज खड़ा था उसका ध्यान सामने था ,,पर रिया तो बस पागलों की तरह उसे ही देखे जा रही थी,,,इस तरह देखने से अधिराज को इनसिक्योर फील होने लगा ।

उसने सीधा और साफ कहा" मैं ये शादी नहीं करना चाहता,,तुम मना करदो,, मैं तुम्हें पसंद नहीं करता ।

"पर मैं तो करती हूं तुम्हे पसंद,,,शादी करना चाहती हूं तुमसे,,,अच्छे लगने लगे हो तुम,," रिया ने कहा

अधिराज कुछ कहने ही वाला होता है,,तभी पीछे से आवाज आती है " तुम्हारे करने से कुछ नहीं होता मोहतरमा,,,वो मेरा है,,तेरे बाप की जमीर नहीं,,,जो तूने कह दिया और वो तुम्हे मिल गया,,,उसकी तरफ देखना का हक भी तुम्हे नहीं,,,"

उसकी आवाज सुनने से ही अधिराज की धड़कन धक्क धक्क करने लगती हैं,,उसे सुकून सा मिल गया । वहीं रिया तो उसे देख जल भून जाती हैं,,उसने गुस्से से कहा" तुम्हे शर्म नहीं आती ,,वो तुम्हारा चाचा है,, और उससे शादी तो मै ही करूंगी,,हर बार तू मेरे मसले के बीच नहीं आ सकती,,,"

" किसने कहा मैं बीच में आई ,,,हमारी कहानी में तू आई है बीच में,,,सपने देखती रह जायेगी तू,,पर उसकी मंजिल तो मैं हूं,,, अगर मेरे रास्ते का कांटा बनी तो तेरे टुकड़े करके अपने शेरा को खिला दूंगी,,,उस दिन ट्रेलर तो तूने देखा ही है,," आकृति किसी साइको की तरह बोली।

उसकी बात सुन एकदम से रिया डर गई,,पर उसने हार ना मानते हुए कहा" तुझे लगता हैं मैं तेरी धमकी से डर जाऊंगी,,नहीं रे तू छोटी बच्ची है,,,एक  बार जो चीज पसंद आती हैं वो मेरी होती हैं,समझी तू,,"

अधिराज तो उनको सौतनो की तरह लड़ता देख रहा था,,,जैसे कोई आठवां अजुबा हो,,,वही आकृति के फेस पर डेविल स्माइल आ जाती हैं,,उसने अधिराज को अपनी तरफ किया,,उसके इस तरह रिएक्ट करने से वो हैरान हो गया,,अचंभे की तरह उसे देखने लगा,,जैसे कि उसका आगे का स्टेप क्या होगा,,, आकृति ने उसकी टाई खींच कर झुकाया और सिर को पीछे से पकड़ अपने चेहरे को टेढ़ा कर उसके होठों को कैप्चर कर लिया ।

उसके एक्शन से अधिराज की धड़कनों का शोर पूरे टेरेस पर गूंजने लगा,,,रिया तो मानो गुस्से से पगला गई,,,उसने आकृति से अधिराज को दूर करने के लिए हाथ बढ़ाया,पर  अधिराज आकृति को लेकर घूम गया और दीवार से सटाकर deeply किस करने लगा,,,जैसे मानो लॉलीपॉप चूस रहा हो,,अधिराज के घूमने से आकृति ने पीछे रिया के घुटने पर किक किया जिससे वो धड़ाम से नीचे गिर गई,,उन दोनों ने उसे नजरअंदाज कर खुद में खोए हुए थे।

कुछ देर बाद जब दोनों अलग हुए तो उन दोनों ने नीचे गिरी हुई रिया को देखा जिसके पैर में मोच आ गई थी,,उसकी आंखों में आंसू थे,,,तो आकृति ने उसकी तरफ झुकते हुए कहा " आगे से उसे टच करने का सोचना भी मत डार्लिंग,,,अभी तो बस पैर मुड़ा है,,आगे हाथ भी टूट सकता,,सो be carefully 😼," इतना कहकर  उसने अधिराज के गले में बाहें डाली,,अधिराज तो तभी से बस किसी पागल दीवाने की तरह उसे ही देखे जा रहा था,," तुम्हारी ही हूं,,, जब चाहो तब देख सकते हो,,,पर पहले मुझे ये बताओ तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई,,किसी और की तरफ नजर उठाकर देखने की,,और तो और शादी के लिए ह्म्म भी की,, इसकी पुनिशमेंट तो मिलेगी ही,,"

   अधिराज की नजर अभी भी उसके चेहरे पर ही टिकी हुई थी,,उसने उसकी कमर से पकड़ खुद से सटा लेता है,,और उसके गालों पर होठों से रगड़ते हुए बोला " तुम्हारी सजा तो सर आंखों पर मेरी जान,,,पर तुम्हें जब जब देखता हूं तो पागल सा हो जाता है,,दिल करता है तुम्हे हमेशा हमेशा के लिए अपना बना लू,,तुम्हारी बॉडी मुझे वो करने पर मजबूर करती हैं,,जिसके बारे में मैने कभी सोचा भी नहीं""" उसने सेड्यूसिंग आवाज में कहा।वही आकृति के चेहरे पर न दिखने वाली मुस्कान थी,,,

दूसरी तरफ रिया तो उसकी बेशर्म भरी बातें सुन हैरान हो गई,,जो इंसान किसी लड़की को अपने पास नहीं आने देता था,,वो अपनी ही भाई की बेटी के साथ वो सब करना चाहता है,,,how पॉसिबल,,, चाचा भतीजी कैसे रिलेशनशिप में आ सकते हैं,,," रिया तो उनके बारे में अनाप शनाप सोच रही थी,,पर उसे क्या पता कि इनका रिश्ता चंद पलो का नहीं बल्कि जन्मों जन्मों का है,,,दूर रहकर भी इन दोनों ने कभी किसी और की तरफ नजर उठाकर भी नहीं देखा ।

    जहां ये दोनों पागल दीवानें दीदार कर रहे थे,,,वही हॉल में रिश्ता पक्की होने की खुशी में झूम रहे थे,,तभी रिया आती हैं लगंडाकर चलते हुए,,जब उसने उन लोगों को खुशी मनाते हुए देखा,,तो वो उन लोगों से बोली " आप सबको लगता किस चीज की खुशी हो रही,,,आपको पता भी आपका बेटा और पोती का अफेयर चल रहा है,,,उसने शादी करना तो दूर मेरी तरफ नजर उठाकर भी नहीं देखा ,,और वो उस आकृति को मेरे सामने ही किस किया,,कितनी बेशर्मी वाली बात है ना चाचा भतीजी सीक्रेट रिश्ता ,,क्या टाइम आ गया,,आजकल रिश्तों की भी कोई इज्जत छोड़ी नहीं,,आपकी पोती ने,,,"

रिया की बातें सुन आतिश ,वंश और अंशिका गुस्से से लाल पीले हो गए,,वही दादी और शिविका का सिर शर्म से झुक गया।  नीलिमा ने रिया को डांटते हुए कहा " क्या बकवास कर रही हो ,, तुम रिया,,,"

रिया अपनी मां से " मोम मैं कोई बकवास नहीं की,,खुद आंखों से देखा और तो और उस आकृति की बच्ची ने मुझे गिराया भी,,"

गिराने वाली बात सुन शिविका को गुस्सा आ,,उसने नीचे आती हुई आकृति को थप्पड़ मारने के लिए हाथ उठाया,,पर उसके पीछे ही अधिराज आ रहा था उसने शिविका का हाथ पकड़ लिया" बस बहुत हुए भाभी,, मैं और बर्दाश्त नहीं कर सकता,,"

शिविका अपना हाथ छुड़ाकर"तुम कौन होते हो,,मुझे रोकने वाले ,,उसकी मां हूं मैं,,, और ये सब जो भी हो रहा है तेरी वजह से हो रहा है,,,दूर क्यों नहीं चला जाता मेरी बेटी से,,,"

"बस मां,,, बस शिवि"  आकृति और आतिश एक साथ बोले,,आकृति बिना देर किये अधिराज का हाथ अपने हाथ में लेकर ,,आतिश के सामने खड़ी हो जाती हैं" आपको कोई दिक्कत है हमारे रिश्ते से डैड,," तो आतिश ना में सिर हिलाकर दोनों को गले से लगा लेता है।

आकृति उनसे दूर होकर शिविका के सामने आंखों में आंखे डालकर " एक बात कान खोलकर सुन लीजिए,,मां हैं आप मेरी ,भाग्य विधाता नहीं ,,जो मेरी लाइफ को अपने हाथों से चलाना चाहती हैं,,,राज मेरा प्यार नहीं,,जिद और जुनून भी है,,,उसके लिए मैं जान दे भी सकती हूं,तो ले भी सकती हूं,,,आगे से उसके खिलाफ एक शब्द भी मत कहना वरना भूल जाऊंगी ,,आप मेरी मां हैं,," उसने एक एक शब्द सर्द आवाज में कहा।

उसकी बातों से शिविका के आंखों में आंसू झर झर बहने लगे,,आतिश और आकृति ने उन्हें इगनोर कर दिया,,,पर अधिराज को ये देख दुख भी हो रहा था,,वही गरिमा को तो किसी चीज की सुध बुध नहीं थी,,,कैसे वो अपने बेटे और पोती को इस तरह के बंधन में देख सकती,,।

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