वहीं रिया जो आकृति को थप्पड़ पड़ते हुए देखना चाहती थी,,पर अधिराज का बीच में आना उसे पसंद नहीं आया उसने अपनी बातों में जहर घोलते हुए बोली " तुम्हें शर्म नहीं आती,,अपनी मां से लड़ रही हो,,इसके लिए,,, मुझे तो उस दिन ऑफिस में ही पता चल गया था,,,जब तुम मीटिंग रूम में बिना नोक किए घुस गई,,,,पर इतनी बेशर्म और बतमीज होगी ये नहीं पता था,,,"
अधिराज आकृति के बारे सुन गुस्से से पगला जाता है,,उसने पंच बनाकर सीधा उसके मुंह पर मारा,,,पंच लगते ही वो अपनी मां के ऊपर ओंधे मुंह गिर गई,,, अचानक हुए हमले से कुछ लोग खुश थे,,वही गरिमा जी को भी अब गुस्सा आने लगा अधिराज पर " बस करो अधि,,,और कितना गिरोगे तुम ,,यही संस्कार दिए थे ,,, तुमने तो मेरी परवरिश पर भी कलंक लगा दिया,,,शर्म तो बहुत पहले ही त्याग चुके हो अब संस्कार भी बेच दिए क्या,,,क्या है उसमें जो बाकियों लड़कियों में नहीं,,,तेरे बड़े भाई को बेटी है वो,,,चल वो तो जिद्दी है,,पर तू तो समझदार था,,,कैसे कर लिया तूने,,,,हमारे,,इज्जत के बारे में एक बार भी ख्याल नहीं आया,,, तेरी भाभी की तरफ देख नजर उठाकर,,,क्या बिगाड़ा था उसने,,,तुझे अपने बेटे से भी ज्यादा प्यार किया,,,और तुमने ये सिला दिया उसका,,," वो धम से नीचे बैठ जाती है किसी बेसहारा की तरह ।
अपनी मां की बातों से अधिराज सोचें लगा " क्या सच में मैने कोई गलती की,,, सच ही तो है मैने सभी को धोखा दिया,,,दूर रहना चाहता था पर हर बार दिल से मजबूर हो जाता और उसके करीब चला जाता,,,क्या सही में हमारा फ्यूचर नहीं,,," इतना सोच उसने अपने बड़े भाई की तरफ देखा जो उसे ही देख रहा था।
आतिश उसके हावभाव देख अच्छे से समझ गया,,,की वह कुछ गलत सोच रहा है उसने उसकी परेशानी को खत्म करते हुए कहा" अधि तुम्हें इस तरह परेशान होने की जरूरत नहीं,,,तू मेरा भाई है किसी के हाथ की कठपुतली नहीं,,, तुझे जैसा ठीक लगे वो करो,,,पर किसी के दबाव में आकर कोई गलत फैसला मत लेना,,,/"
रिया तो मजे से सिंघानिया परिवार की लड़ाई देख रही थी,,,एकदम से आकृति की नजर जब उस पर जाती हैं तो वह सब समझ जाती है कि वो घर में हो रहे क्लेश का लुत्फ उठा रही हैं,,,उसने भी गहरी स्माइल से उसको देख कहा " तो मिस रिया ठाकुर अब तो आप समझ गई होगी,,,ये रिश्ता किसी भी हाल में नहीं हो सकता,,सो गेट लॉस्ट,,, आगे से उसके पास आना तो दूर देखने का भी मत सोचना,,,समझ गई या फिर सिंघानिया वाले अवतार में समझाना पड़ेगा..." उसकी गहरी और सर्द आंखे देख तो एकबार सभी डर गए,,फिर रिया तो चीज ही क्या है।वो अपनी जगह से दो कदम पीछे हट गई,,,उसे ऐसे हटता देख आकृति की आँखें मुस्कुराने लगी ।
नीलिमा से जब अपनी बेटी की बेइज्जती बर्दाश्त नहीं हुई तो वो बोली " गरिमा यहां हमें हमारी बेइज्जती करने के लिए बुलाया,,,और ये जिसे तुम अपनी पोती कह रही हो ,,किसी प्रकार से भी नहीं लगती,,,"
" बस करिए मां,, जिसके बारे में आप बोल रही हैं,वो मेरे बेटे के समान हैं,,,मैने पहले ही रिया को इस रिश्ते के लिए मना किया था,,,पर उसे तो जिद्द करनी थी,,उसकी जिद्द में आपने भी साथ दिया,,,लास्ट बार कह रहा हूं,,,मेरे बेटी पर हर उठने वाली उंगली को तोड़ दूंगा मैं,,," वंश ने गुस्से से चिल्लाकर कहा,,,वो कबसे हो रहे तमाशे को देख रहा था ,,उसके गुस्से को देख सब हैरान हो गए,,क्योंकि वो ज्यादातर शांत ही रहता था। उसने सभी को चलने का इशारा किया,, सभी को अपने साथ लेकर चला गया । सिंघानिया को उसका इस तरह जाना अच्छा नहीं लगा,,,पर आकृति सब समझ गई ,,की उसके स्वीटहार्ट ने ऐसा क्यों किया ।
उसने शिविका और गरिमा कि तरफ देख कहा " आप दोनों को जो तमाशा करना था कर लिया,,,आज के बाद कोई भी तमाशा क्रिएट मत करना,,,और ये सब आपकी वजह से हुआ डैड,,मैने कहा था आपको अगर एक बार इंडिया आ गई,,तो आपके भाई को मेरा होने से कोई नहीं रोक सकता,,,फिर भी अपने बुलाया,,,पहले आपने मुझे दूर किया,,अब ये दोनों करना चाहती है ,,,आप लोग क्यों नहीं समझते मैं प्यार करती हूं इससे,,,मेडली लव विद राज ❤️ ,,,नहीं रह सकती इनके बिना,,,जबसे आंखे खुली हैं बस इन्हें ही अपने करीब पाया है,,,जनून,, सुकून,,चैन सब है वो मेरा,,,,जब वो मेरे पास नहीं होते,,गुस्सा छाने लगता है मुझ पर,,कोई भी चीज अच्छी नहीं लगती,,,उसको बिना देखे बेचैन हो जाती हूं,,एक बार ,,नहीं हजार बार नहीं बार बार कहूंगी,,सबके सामने वो सिर्फ मेरा है,,अधिराज के बिना आकृति का कोई वजूद नहीं,,, अगर फिर भी आप लोगो ने उसे मुझसे छीनने की कोशिश की तो मेरा मरा हुआ मुंह देखोगे, नहीं तो पूरी दुनिया में तबाही होगी,,,आखिरी वार्निंग है"" वो बिना किसी को देखे अपने रूम में चली गई ।
आतिश भी अपनी बीवी और मां के सामने ना मै सिर हिलाकर बाहर चला जाता है,,उन दोनों के सिवा अधिराज था ,,वो भी किसी पुतले की तरह खड़ा था,,,शिवि ने उससे बात करनी चाही ,,पर वो इगनोर कर आकृति ले पीछे ही चला गया।
शिवि ने गरिमा की तरफ देखा,,जो खाली आंखों से ऊपर की तरफ देख रही थी,,जहां से अधिराज गया था। शिवि ने उनके कंधे पर हाथ रख " मां क्या हो रहा है सब,,,वह दोनों ही नहीं समझ रहे,,ये सब ठीक नहीं है,,दुनिया क्या सोचेगी हमारे बारे में,,क्या इज्जत रहेगी मां,,,मै अपनी बेटी और बेटे समान देवर को दुखी भी नहीं देख सकती,,," शिवि किसी कांच की तरह बिखर कर अपनी सास के गले लग रो रही थी ।
उसे इस तरह टूटा हुआ देख उनकी आंखों में भी आंसु की धारा बहने लगी । आखिर उन्हें भी पता था प्यार के बिना रहना कितना मुश्किल होता है, आखिर उन्होंने भी तो प्यार किया था,,यही सोच सोच दोनों रो रही थीं कि आगे क्या होगा,,,उनके बच्चों की जिंदगी में।
गरिमा ने उसकी पीठ थपथपा कर " शिवि बच्चा हमने आज तक अपने बच्चों की खुशी देखी है,,फिर अब कैसे उन्हें अनदेखा करदे,,,वही होगा जो वो चाहते हैं,,,हमें ना तो कल कोई समाज की फिक्र थी ना आज है,,बस अपने बच्चों को समझने में देर हो गई,,,अब और नहीं दूरी बर्दाश्त करने देंगे.." गरिमा की बात सुन शिवि के चेहरे पर 440 वाट की मुस्कान आ गई,,आखिर उसने आज तक अपनी सास के गुस्से के कारण ही तो अपनी बेटी और देवर को भला बुरा कहा । पर जब उसने ह्म्म करदी तो अब कोई फिक्र नहीं थी ।
वहीं आकर्षक जो सुबह ही मीटिंग के लिए बाहर चला गया था,,अभी आया था अपनी मां और दादी की बात सुन उसे भी बहुत खुशी हुई,, वो भी तो बस उन दोनों की खुशी चाहता था ।
आखिर ऐसा कौनसा भाई होगा जो अपनी बहन को दुखी देख सके,,फिर आकृति तो उसकी बहन कम जान ज्यादा थी,,आज तक अपने से पहले हर बार उसका ही पहले सोचा है,,,क्योंकि उसकी बहन नहीं छोटा भाई ज्यादा थी,,जब भी उसे जरूरत पड़ी थी,,वो हमेशा एक भाई की तरह ढाल बनकर खड़ी थी,,,फिर अब वो कैसे उसे दुखी होते देख सकता था,,,।चाहती तो आकृति बिना अपने परिवार की मर्जी से अधिराज को अपना बना लेती,,,पर वो चाहती थी कि उसका परिवार उसका साथ दे,,उसकी खुशी में साथ खड़े,,जैसे हमेशा रहते थे ।


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